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देशपांडे पंचांग

देशपांडे पंचांग महाराष्ट्र में प्रकाशित पहला सूर्य-सिद्धांतीय पंचांग है और भारत में एकमात्र शुद्ध सूर्य-सिद्धांतीय पंचांग है। इसे श्री गौरव देशपांडे ने पुणे, महाराष्ट्र से तैयार किया है। गौरव पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, पर बचपन से वैदिक ग्रंथों और ज्योतिष में गहरी रुचि रही है।

पंचांग का अर्थ है ‘पंच अंग’ (संस्कृत) — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण इसके मुख्य पाँच अंग हैं।

अध्ययन में उन्होंने जाना कि हिंदू परंपरा में मुख्यतः दो पंचांग पद्धतियाँ हैं — प्राचीन ‘सूर्य-सिद्धांतीय पंचांग’ और ‘दृक पंचांग’, जिसका इतिहास 50–60 वर्ष से अधिक नहीं है।

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गौरव देशपांडे

गौरव देशपांडे

संस्थापक, देशपांडे पंचांग · पुणे, महाराष्ट्र

संस्थापक और मार्गदर्शक

गौरव पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और मुंबई में अपनी कंपनी के सीईओ के रूप में कार्य करते हैं। बचपन से ज्योतिष, खगोल विज्ञान और धर्मशास्त्र में रुचि रही है। महाराष्ट्र में 60 वर्षों से बंद प्राचीन सूर्य-सिद्धांतीय पंचांग परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए वे पिछले 9 वर्षों से ‘धर्मशास्त्र सम्मत देशपांडे पंचांग’ प्रकाशित कर रहे हैं।

ज्योतिष, पंचांग, धर्मशास्त्र और त्रिस्कंध ज्योतिष का अध्ययन वाराणसी के पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड गुरुजी के मार्गदर्शन में हुआ। 2013 में अंगुलाल्प चंद्रग्रहण पर काशी धर्मसभा की विशेष सभा की अध्यक्षता पर ‘ज्योतिषरत्न’ और ‘गणकप्रवर’ से सम्मानित।

शृंगेरी शंकराचार्य, जगन्नाथ पुरी के शंकराचार्य आदि से सम्मान प्राप्त। धर्मशास्त्र, ज्योतिष, अध्यात्म, मंत्रशास्त्र, आयुर्वेद और पंचांग पर हजारों व्याख्यान। समाचार पत्र, टीवी और इंटरनेट के माध्यम से प्रबोधन जारी। एक लाख से अधिक कुंडलियाँ देखी गईं; कुंडली और वास्तु मार्गदर्शन वैज्ञानिक अनुशासन से चल रहा है।

  • ज्योतिषरत्न और गणकप्रवर — काशी धर्मसभा (2013)
  • 9+ वर्षों से महाराष्ट्र में धर्मशास्त्र सम्मत देशपांडे पंचांग
  • 1,00,000+ कुंडली · ज्योतिष और वास्तु मार्गदर्शन जारी